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कार पर Kiss या कार में Kiss? जानें Traffic Fines के नियम

आजकल सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए युवा कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। कई बार इसी चक्कर में वे अनजाने में बड़ी मुसीबत में फंस जाते हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश के ग्वालियर में ऐसा ही एक अजीबोगरीब मामला सामने आया। यहां एक युवक ने अपनी सफेद रंग की कार को लिपस्टिक के करीब 3,400 ‘किस’ के निशान से सजा दिया और फिर इस ‘किसिंग कार’ को सड़क पर दौड़ाते हुए खतरनाक स्टंट किए। इस घटना के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर कार के बाहर इस तरह की हरकत करने पर या कार के अंदर ऐसा कुछ करने पर कानून क्या कहता है और किस पर ज्यादा Traffic Fines लग सकते हैं। आइए जानते हैं क्या हैं इस बारे में नियम।

ग्वालियर का “किसिंग कार” मामला और चालान

ग्वालियर में एक युवक ने अपनी कार को पूरी तरह से लिपस्टिक के निशानों से ढक दिया। इसके बाद उसने शहर की सड़कों पर तेज रफ्तार से गाड़ी चलाकर स्टंट किए और इसका वीडियो भी बनवाया। जैसे ही यह वीडियो ट्रैफिक पुलिस की नजर में आया, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। कार नंबर के आधार पर मालिक का पता लगाया गया और उस पर 5,500 रुपये का भारी चालान काटा गया। इतना ही नहीं, पुलिस ने युवक से थाने में ही कार से सारे लिपस्टिक के निशान साफ भी करवाए।

क्यों लगा चालान?

ग्वालियर पुलिस की इस कार्रवाई के पीछे ट्रैफिक सुरक्षा और मोटर वाहन अधिनियम के कड़े नियम जिम्मेदार हैं। मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) के तहत, गाड़ी के मूल डिज़ाइन या पेंट में ऐसा कोई भी बदलाव करना गैरकानूनी है, जिससे उसकी पहचान छिप जाए। पूरी कार पर हजारों लिपस्टिक के निशान लगाकर सड़क पर दौड़ाने से अन्य चालकों का ध्यान भटकने का गंभीर खतरा रहता है। इसके अलावा, वायरल वीडियो में युवक को सड़क पर लापरवाही और तेज रफ्तार से गाड़ी चलाते हुए भी देखा गया, जिसे खतरनाक ड्राइविंग की श्रेणी में रखा जाता है। इन्हीं वजहों से पुलिस ने 5,500 रुपये का चालान काटा और युवक को चेतावनी देकर कार साफ करवाई।

कार के अंदर ‘किस’ करने पर क्या कहता है कानून?

यदि कोई व्यक्ति चलती या खड़ी कार के अंदर ऐसी किसी हरकत में शामिल पाया जाता है, जो सार्वजनिक रूप से ठीक नहीं मानी जाती, तो उस पर केवल ट्रैफिक नियमों के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की धाराएं भी लागू हो सकती हैं। आपकी कार भले ही आपकी निजी संपत्ति हो, लेकिन जब वह किसी सार्वजनिक सड़क, पार्किंग या किसी पब्लिक प्लेस पर खड़ी होती है, तो उसके अंदर की गतिविधियां भी सार्वजनिक दायरे में आ जाती हैं।

अगर कार के शीशे पारदर्शी हैं और अंदर की हरकतें बाहर से साफ दिखाई दे रही हैं, तो पुलिस सार्वजनिक स्थान पर अश्लीलता (Public Obscenity) फैलाने के तहत कार्रवाई कर सकती है। ऐसी स्थिति में आपको न सिर्फ भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है, बल्कि पुलिस केस दर्ज कर आपको हिरासत में भी ले सकती है।

कब लगता है भारी जुर्माना? दोनों मामलों की तुलना

अब अगर हम दोनों ही मामलों की तुलना करें, तो कार पर स्टंट करने या उसके रंग-रूप से छेड़छाड़ करने पर आमतौर पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान का भुगतान करना पड़ता है, जो कुछ हजार रुपये का होता है। लेकिन, अगर कार के अंदर या बाहर कोई ऐसी गतिविधि की जाती है, जिससे सार्वजनिक शांति भंग होती है या अश्लीलता फैलती है, तो मामला सीधे आपराधिक कानून (Criminal Law) के दायरे में चला जाता है।

ऐसे मामलों में पुलिस सिर्फ चालान ही नहीं करती, बल्कि एफआईआर (FIR) भी दर्ज कर सकती है और गाड़ी जब्त भी कर सकती है। साथ ही, आपको कोर्ट-कचहरी के चक्कर भी काटने पड़ सकते हैं। इसलिए, कानूनी झंझटों और बड़े नुकसान से बचने के लिए सार्वजनिक सड़कों पर नियमों का पालन करना ही समझदारी है।

सोशल मीडिया स्टंट: एक गंभीर चेतावनी

ग्वालियर की “किसिंग कार” वाली घटना यह साफ संदेश देती है कि रील्स बनाने या सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए ट्रैफिक नियमों को तोड़ना बहुत भारी पड़ सकता है। पुलिस अब सोशल मीडिया निगरानी सेल के जरिए ऐसे खतरनाक स्टंट करने वालों पर कड़ी नजर रख रही है।

सड़क पर वाहन चलाते समय आपकी छोटी सी लापरवाही अपनी और दूसरों की जान को खतरे में डाल सकती है। इसलिए, कार को किसी मॉडिफिकेशन या कला के नाम पर अजीबोगरीब ढंग से सजाकर पब्लिक रोड पर चलाने से बचें। हमेशा सुरक्षित ड्राइविंग करें और कानून के दायरे में रहकर ही गाड़ियों का इस्तेमाल करें ताकि भारी Traffic Fines और कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।

Vivek Rakshit

विवेक रक्षित एक अनुभवी हिंदी पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। वे टेक्नोलॉजी, बिज़नेस और राजनीति से जुड़ी खबरों को सरल हिंदी में पाठकों तक पहुँचाते हैं। उत्तर भारत के पाठकों के लिए विश्वसनीय और तथ्यात्मक समाचार प्रस्तुत करना उनकी प्राथमिकता है। NewsM.in के संस्थापक और प्रधान संपादक के रूप में वे डिजिटल मीडिया में हिंदी पत्रकारिता को नई दिशा दे रहे हैं।

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