बिहार के जमुई में एक नाबालिग लड़की और उसके दोस्त के साथ हुई छेड़छाड़ के मामले में अब एक नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया है। जमुई छेड़छाड़ केस के मुख्य आरोपी नंदन यादव की मां ने बिहार पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए हाल ही में हुए एनकाउंटर को पूरी तरह से फर्जी (Staged Encounter) करार दिया है। महिला का दावा है कि पुलिस ने अपनी नौकरी बचाने के लिए उनके बेटे के हाथ में हथियार थमाकर उसे गोली मारी है। आरोपी की मां ने राज्य सरकार से गुहार लगाई है कि उनके बेटे को सुधरने का “एक और मौका” दिया जाए।
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जमुई छेड़छाड़ केस से जुड़ी मुख्य जानकारी
21 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया पर एक बेहद आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में जमुई में कुछ मनचले युवक एक नाबालिग लड़की और उसके पुरुष मित्र के साथ बुरी तरह छेड़छाड़ और बदसलूकी करते नजर आ रहे थे। वीडियो के वायरल होते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। जमुई के पुलिस अधीक्षक (SP) विश्वजीत दयाल के निर्देश पर तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई और एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की। 22 सितंबर को टाउन थाना क्षेत्र में पुलिस ने मुख्य आरोपी नंदन यादव को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के दौरान नंदन ने भागने की कोशिश की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसके पैर में गोली मार दी। बिहार के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) केएस अनुपम ने भी मुख्य आरोपी और उसके साथियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की थी।
घटना कैसे हुई: आरोपी की मां के गंभीर आरोप
अब इस चर्चित जमुई छेड़छाड़ केस में मुख्य आरोपी नंदन यादव की मां सामने आई हैं। समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, महिला ने पुलिस के एनकाउंटर वाले दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने पुलिस की पूरी कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निम्नलिखित आरोप लगाए हैं:
- फर्जी एनकाउंटर का आरोप: मां का कहना है कि पुलिस ने अपनी नौकरी और साख बचाने के लिए एनकाउंटर का यह पूरा दिखावा किया। उन्होंने बताया कि उनका बेटा नदी के किनारे भैंसों के पास एक गौशाला के निकट था, जब पुलिस ने उसे दिन के समय पकड़ लिया था।
- हथियार प्लांट करने का दावा: महिला ने दावा किया कि उनके बेटे के पास कोई बंदूक या गोली नहीं थी। पुलिस ने जानबूझकर मामले को असली एनकाउंटर दिखाने के लिए नंदन के हाथों में हथियार या प्रतिबंधित पदार्थ (Contraband) थमा दिए।
- भागने के लिए मजबूर किया: आरोपी की मां ने कहा कि नंदन ने पुलिस को देखते ही माफी मांग ली थी, लेकिन पुलिस वालों ने उसे गालियां दीं और उसे दौड़ने पर मजबूर किया। “मेरे बेटे ने मुश्किल से दो कदम बढ़ाए होंगे, तभी उन्होंने उसके पैर में गोली मार दी।”
“सुधरने का एक मौका दे सरकार”
आरोपी की मां का कहना है कि उनका बेटा आमतौर पर घर से दूर रहकर ड्राइवर के रूप में काम करता है। वह विश्वकर्मा पूजा (Vishwakarma Puja) के अवसर पर अपनी मां को उनके मायके से वापस लाने के लिए घर आया हुआ था और खेती के काम में मदद कर रहा था।
महिला के मुताबिक, उनके बेटे को गांव के ही एक लड़के ने फोन करके घटनास्थल पर बुलाया था। उन्होंने अपने बेटे को निर्दोष बताते हुए सरकार से अपील की है, “मेरा बेटा निर्दोष है। हम सरकार से आग्रह करते हैं कि उसे सुधरने का एक और मौका दिया जाए।” इसके साथ ही उन्होंने रोष में यह भी कहा कि अगर उनका बेटा दोषी है, तो उस समय वहां मौजूद सभी 5 आरोपियों को बिल्कुल एक जैसी सजा मिलनी चाहिए और सबको गोली मार देनी चाहिए।
पुलिस और प्रशासन की कड़ी कार्रवाई
इस जमुई छेड़छाड़ केस में पुलिस और प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहा है। घटना के बाद पीड़िता के माता-पिता ने बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर अपनी बेटी के लिए न्याय की गुहार लगाई थी। सरकार ने परिवार को पीड़िता की सुरक्षा और शिक्षा का पूरा भरोसा दिया है।
इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी इस खौफनाक घटना का स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लिया है।
पिता भी हुआ गिरफ्तार: इस जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने मुख्य आरोपी नंदन यादव के पिता गनौरी यादव को भी गिरफ्तार कर लिया है। गनौरी यादव साल 2003 में जमुई के प्रतापपुर गांव में हुए दोहरे हत्याकांड में मुख्य आरोपी था और पिछले दो दशकों से पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था।
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निष्कर्ष और मामले में आगे क्या होगा?
जमुई छेड़छाड़ केस में जहां एक तरफ पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर त्वरित न्याय देने की दिशा में कदम बढ़ाया है, वहीं आरोपी की मां के बयानों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, मां के इन दावों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी या जांच समिति ने पुष्टि नहीं की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस विभाग या राज्य सरकार इन आरोपों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है और अदालत इस मामले की सुनवाई किस दिशा में ले जाती है।

