जालंधर स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में एक छात्रा से बलात्कार की अफवाह फैलने के बाद छात्रों का उग्र LPU छात्र प्रदर्शन शनिवार से जारी है, जिसने अब राष्ट्रीय राजमार्ग को भी अवरुद्ध कर दिया है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों की पुलिस के साथ झड़पें हुईं, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए और कम से कम तीन पुलिस वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने 28 सितंबर 2026 से अगले 10 दिनों के लिए सभी नियमित कक्षाएं और मिडटर्म परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। यह घटनाक्रम परिसर में तनावपूर्ण माहौल के बीच आया है, जहां छात्र अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं और प्रशासन शांति बहाल करने के लिए प्रयासरत है।
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LPU छात्र प्रदर्शन: हिंसा और हाईवे जाम की वजह क्या है?
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में कथित तौर पर एक छात्रा के साथ हुए बलात्कार की अफवाह ने छात्रों के बीच बड़े पैमाने पर असंतोष पैदा कर दिया। शनिवार से ही बड़ी संख्या में छात्र इस मामले की गहन जांच और न्याय की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 27 सितंबर 2026 को यह प्रदर्शन और अधिक उग्र हो गया, जब सैकड़ों छात्रों ने जालंधर के बाहर से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया, जिससे लंबा जाम लग गया और स्थिति अत्यधिक तनावपूर्ण हो गई।
जालंधर के एसएसपी हरविंदर सिंह विर्क ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस बल के बीच हुई सीधी झड़प में कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं। छात्रों ने पुलिस वाहनों पर पथराव भी किया, जिसके परिणामस्वरूप तीन गाड़ियों में आग लगा दी गई और कई अन्य क्षतिग्रस्त हो गईं। पुलिस और LPU प्रबंधन के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन यह बातचीत किसी भी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँच पाई, और छात्रों का प्रदर्शन जारी रहा।
विश्वविद्यालय प्रशासन के बड़े फैसले: कक्षाएं रद्द, परीक्षाएं स्थगित
बढ़ते विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने स्थिति को नियंत्रित करने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। विश्वविद्यालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर घोषणा की है कि 28 सितंबर 2026 से अगले 10 दिनों के लिए विश्वविद्यालय परिसर में सभी नियमित कक्षाएं स्थगित रहेंगी।
इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय ने अगली सूचना तक सभी मिडटर्म परीक्षाओं को भी टाल दिया है। परीक्षा का संशोधित कार्यक्रम छात्रों को विश्वविद्यालय प्रबंधन प्रणाली (UMS) के माध्यम से अलग से सूचित किया जाएगा। विश्वविद्यालय ने छात्रों को सलाह दी है कि यदि वे चाहें तो इन 10 दिनों की अवधि के लिए अपने अभिभावकों के पास लौट सकते हैं।
हालांकि, जो छात्र विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रुकने का विकल्प चुनते हैं, उन्हें हॉस्टल परिसर के भीतर ही रहने और अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने का सख्त निर्देश दिया गया है। यह कदम परिसर में शांति और व्यवस्था बनाए रखने तथा छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
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प्रदर्शनकारी छात्रों का दावा: हिंसा में बाहरी तत्वों का हाथ
प्रदर्शनकारी छात्रों में से एक ने आजतक को बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में हुई आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं के लिए ‘बाहरी लोग’ जिम्मेदार हैं। छात्र के अनुसार, जब तक केवल LPU के छात्र शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे, तब तक स्थिति नियंत्रण में थी। लेकिन बाद में कुछ बाहरी तत्वों ने इस आंदोलन में घुसपैठ की और हिंसा को भड़काया, जिससे संपत्ति को नुकसान हुआ और पुलिस के साथ झड़पें हुईं।
प्रदर्शनकारी छात्र ने जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालय के छात्र केवल मामले में जवाबदेही और प्रशासन के साथ साफ-सुथरी बातचीत चाहते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य कथित घटना की सच्चाई सामने लाना और न्याय सुनिश्चित करना है, न कि हिंसा या तोड़फोड़ करना।
डीन का आश्वासन और LPU प्रबंधन का खंडन
इस बीच, विश्वविद्यालय के छात्र विंग के डीन सौरभ लखनपाल ने मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय हर तरह की जांच के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने छात्र प्रतिनिधियों को भी जांच प्रक्रिया में शामिल करने का आश्वासन दिया, जिसमें सीसीटीवी फुटेज दिखाना और पूरी पारदर्शिता बरतना शामिल है। डीन ने अफवाहों की भी गहन जांच कराने की बात कही है।
वहीं, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार डॉ. मोनिका गुलाटी ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैल रही बलात्कार की अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें ‘झूठा, निराधार और मनगढ़ंत’ बताया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर ये गलत अफवाहें फैला रहे हैं, जिसका उद्देश्य छात्रों के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा करना और विश्वविद्यालय के शांतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल को बिगाड़ना है।
डॉ. गुलाटी ने स्पष्ट किया कि इन अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं है और उन्होंने सभी लोगों से ऐसी भ्रामक जानकारियों पर विश्वास न करने की अपील की है। विश्वविद्यालय प्रशासन का यह रुख है कि इन अफवाहों के पीछे केवल अराजकता फैलाना और विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाना है।
मौजूदा हालात और आगे की चुनौतियां
राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुलिस और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला है, और छात्र अभी भी प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। एफआईआर की कॉपी और मामले से संबंधित विशेष जांच दल (SIT) की जानकारी छात्र प्रतिनिधियों के साथ साझा की गई है, लेकिन वे वर्तमान में अपने ही प्रतिनिधियों की बात सुनने से इनकार कर रहे हैं।
जालंधर में LPU छात्र प्रदर्शन के कारण स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और स्थानीय प्रशासन तथा विश्वविद्यालय अधिकारी परिसर में और आसपास शांति व कानून व्यवस्था बहाल करने के प्रयासों में लगातार जुटे हुए हैं। आगे क्या होगा, यह छात्रों की मांगों और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

