Xप्लेन: आज से अमेरिका में लागू हुए नए ग्रीन कार्ड नियम, जानिए भारतीयों पर इसका क्या असर होगा

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अमेरिका ने ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) के लिए आवेदन करने वाले कुछ लोगों के सरकारी मदद पर निर्भर होने की संभावना का आकलन करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव किया है. 18 सितंबर यानी आज से अमेरिका का यह नया इमिग्रेशन नियम लागू हो गया है, जो स्थायी निवास के लिए आवेदन करने वाले लोगों की आर्थिक और व्यक्तिगत स्थितियों के मूल्यांकन के सरकारी तरीके को बदलता है.

इस बदलाव के केंद्र में पब्लिक चार्ज टेस्ट है, जो अमेरिकी इमिग्रेशन कानून का एक पुराना प्रावधान है. यह अधिकारियों को यह तय करने की अनुमति देता है कि क्या प्रवेश या स्टेटस में बदलाव चाहने वाले किसी व्यक्ति के मुख्य रूप से सरकारी सहायता पर निर्भर होने की संभावना है. होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने पिछले नियमों को संशोधित करते हुए US सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज को आवेदक की परिस्थितियों की समग्र जांच करने के लिए ज़्यादा अधिकार दे दिए हैं।

अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर रोजगार-आधारित इमिग्रेशन के जरिए स्थायी निवास पाना चाहते हैं, जिसमें H-1B स्टेटस पर कई साल बिताने के बाद आवेदन करना भी शामिल है. हालांकि, सरकारी सुविधा का इस्तेमाल करने का मतलब यह नहीं है कि ग्रीन कार्ड का आवेदन अपने-आप खारिज हो जाएगा. USCIS का कहना है कि अधिकारी आवेदक की सभी परिस्थितियों पर विचार करेंगे और हर मामले के आधार पर निष्पक्ष फैसला लेंगे.

भारतीय आवेदकों, खासकर उन लोगों के लिए जो H-1B या दूसरे अस्थायी स्टेटस से स्थायी निवास की ओर बढ़ रहे हैं, ‘पब्लिक-चार्ज’ से जुड़े इन नए नियमों की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

मुख्य बदलाव क्या है?

अमेरिका ने ग्रीन कार्ड के नियमों में बदलाव किया है. अब अधिकारी यह चेक करते हैं कि कहीं आवेदक भविष्य में सरकारी मदद जैसे मुफ्त राशन, रहने के लिए सहायता या नकद मदद पर तो निर्भर नहीं हो जाएगा. यह नया नियम 18 सितंबर, 2026 से लागू हो चुका है.

तारीख का ध्यान रखें: यह नया नियम 18 सितंबर, 2026 या उसके बाद भरे गए ‘फॉर्म I-485’ (स्टेटस बदलने के आवेदन) पर लागू होता है. इससे पहले के पेंडिंग आवेदनों पर पुराने नियम ही चलेंगे.

सिर्फ सैलरी नहीं, पूरी जिंदगी की जांच: ग्रीन कार्ड मिलने का फैसला सिर्फ इस बात पर नहीं होगा कि आप कितना कमाते हैं. USCIS आपकी उम्र, सेहत, परिवार, बचत, पढ़ाई और स्किल, इन सभी को एक साथ देखकर फैसला करेगा.

सरकारी फायदों का दायरा: अगर आपने पहले कभी कोई सरकारी मदद जैसे फूड कूपन, हाउसिंग या हेल्थकेयर ली है, तो अधिकारी उस पर भी गौर कर सकते हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आपका फॉर्म तुरंत खारिज हो जाएगा.

पुराने लाभ माफ: 18 सितंबर, 2026 से पहले अगर आपने कोई सरकारी फायदा लिया था, तो उसे पुराने नियमों के हिसाब से ही देखा जाएगा. नए नियमों का असर उसके बाद की स्थिति पर होगा.

भारतीय H-1B वर्करों पर असर: जो भारतीय प्रोफेशनल्स H-1B वीजा से ग्रीन कार्ड जैसे EB-1, EB-2, या EB-3 कैटेगरी की तरफ बढ़ रहे हैं, उनके लिए यह जानना जरूरी है. सिर्फ भारतीय होने या H-1B पर होने से कोई ‘पब्लिक चार्ज’ नहीं बनता, सबकी अलग-अलग जांच होगी.

-परिवार वाले भी दायरे में: यह नियम सिर्फ नौकरीपेशा लोगों के लिए नहीं है. जो लोग परिवार के किसी सदस्य (जैसे पति/पत्नी या माता-पिता) के जरिए ग्रीन कार्ड ले रहे हैं, उन पर भी यह लागू हो सकता है.

-किसे छूट मिली है? शरणार्थियों और कुछ खास मानवीय मामलों वाले लोगों को इस नियम से छूट दी गई है.

-कोई फिक्स सैलरी लिमिट नहीं: ऐसा कोई नियम नहीं है कि अगर आपकी सैलरी एक तय सीमा से कम है तो आप फेल हो जाएंगे. अधिकारी आपकी पूरी वित्तीय स्थिति और योग्यता को परखते हैं.

स्पॉन्सर का हलफनामा: यदि आपके पास ‘फॉर्म I-864’ (स्पॉन्सरशिप) है, तो अधिकारी उसे भी देखेंगे, जो यह भरोसा देता है कि कोई दूसरा व्यक्ति आपकी आर्थिक मदद करेगा.

पब्लिक-चार्ज बॉन्ड: अगर अधिकारी को लगता है कि आपके सरकारी मदद पर जाने का थोड़ा भी खतरा है, तो वे आपको ‘फॉर्म I-945’ (बॉन्ड) जमा करने के लिए कह सकते हैं. आप खुद से यह बॉन्ड नहीं भर सकते, एजेंसी के कहने पर ही भरना होता है.

संकल्प ठाकुर पिछले 10 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत न्यूज़ 24 से की, इसके बाद न्यूज़ नेशन में कार्य किया. वर्तमान में वह एबीपी हिंदी डिजिटल में डिप्टी प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं और पिछले सात वर्षों से संस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें खेल, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और चुनावी राजनीति से जुड़ी खबरों की गहरी समझ है. इसके अलावा साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता का क्षेत्र है. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है.

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विवेक रक्षित एक अनुभवी हिंदी पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। वे टेक्नोलॉजी, बिज़नेस और राजनीति से जुड़ी खबरों को सरल हिंदी में पाठकों तक पहुँचाते हैं। उत्तर भारत के पाठकों के लिए विश्वसनीय और तथ्यात्मक समाचार प्रस्तुत करना उनकी प्राथमिकता है। NewsM.in के संस्थापक और प्रधान संपादक के रूप में वे डिजिटल मीडिया में हिंदी पत्रकारिता को नई दिशा दे रहे हैं।
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