मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट का दौर जारी रहा, जहाँ शुरुआती कारोबार में ही बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स 600 से अधिक अंक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 50 भी 22,650 के अहम स्तर से नीचे आ गया। यह गिरावट पिछले सत्र में आई भारी बिकवाली के बाद देखी गई, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल व्याप्त है। इस अप्रत्याशित गिरावट के पीछे उच्च कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार निकासी जैसे कई प्रमुख कारक जिम्मेदार माने जा रहे हैं।
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शेयर बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण
भारतीय शेयर बाजार में मौजूदा गिरावट का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति में संभावित व्यवधानों की चिंताओं के बीच मंगलवार को लगातार दूसरे सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 106.86 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 93.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार सातवें महीने जारी व्यवधान और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में गतिरोध ने आपूर्ति संबंधी चिंताओं को और बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और संघर्ष को समाप्त करने के ईरान के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था, जिससे तनाव और बढ़ गया।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-ईरान गतिरोध के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई उछाल, विदेशी फंडों की लगातार निकासी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कमजोर एशियाई बाजारों ने मिलकर व्यापक बिकवाली को बढ़ावा दिया। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 3,693.93 करोड़ रुपये के इक्विटी बेचे थे, जिससे घरेलू बाजारों पर दबाव बढ़ गया था।
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सेंसेक्स और निफ्टी की ताजा स्थिति
शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 673 अंक गिरकर 72,100 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 में भी 200.35 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,579.90 के स्तर पर आ गया, जो कि 0.88% की गिरावट थी।
पिछले कारोबारी सत्र में भी भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों में भारी गिरावट देखी गई थी। सोमवार को सेंसेक्स 1,124 अंक या 1.52% गिरकर 72,771.72 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 50 में 360 अंक या 1.56% की गिरावट आई थी और यह 22,780.25 पर बंद हुआ था। इस बिकवाली के कारण बीएसई-सूचीबद्ध कंपनियों के संयुक्त बाजार पूंजीकरण से लगभग 8.92 लाख करोड़ रुपये का सफाया हो गया, जिससे यह लगभग 474 लाख करोड़ रुपये तक गिर गया।
रुपये पर गहराया दबाव
शेयर बाजार में गिरावट के साथ-साथ भारतीय रुपये पर भी दबाव बढ़ता देखा गया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया शुरुआती कारोबार में 16 पैसे गिरकर 96.13 के स्तर पर आ गया, जो मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण 96 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे था।
विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने बताया कि रुपया मुख्य रूप से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि के कारण दबाव में है। ये दोनों कारक मिलकर भारत सहित उभरते बाजारों से पोर्टफोलियो प्रवाह को बाहर खींच रहे हैं।
सोने की चमक फीकी, वैश्विक कारक भी जिम्मेदार
सोने की कीमतें भी मंगलवार को सात सप्ताह के निचले स्तर के करीब स्थिर रहीं, क्योंकि इस बात की चिंता थी कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च बनाए रख सकता है। निवेशकों ने ब्याज दर के दृष्टिकोण पर संकेत के लिए अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की एक श्रृंखला का भी इंतजार किया।
स्पॉट गोल्ड 4,124.57 डॉलर प्रति औंस पर लगभग अपरिवर्तित रहा, जबकि अमेरिकी गोल्ड वायदा 0.3% गिरकर 4,156.70 डॉलर पर आ गया। वैश्विक बाजार की यह स्थिति भारतीय बाजार के निवेशकों के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।
आगे क्या? निवेशकों के लिए चुनौतियां
मौजूदा वैश्विक और घरेलू कारकों को देखते हुए, निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक तनाव भारतीय बाजारों के लिए प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इन वैश्विक अनिश्चितताओं में कमी नहीं आती और विदेशी निवेश का प्रवाह फिर से शुरू नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों को सावधानी से निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

