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मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर देश के कई हिस्सों में विपक्षी दलों का प्रदर्शन 12 अक्टूबर को तीसरे दिन भी जारी रहा। इस विरोध प्रदर्शन में राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और धरना दिया। वहीं, दूसरी ओर 42 पूर्व जजों ने चुनाव आयोग के समर्थन में एक खुला ख़त जारी किया है, जिसमें उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं को कथित तौर पर बदनाम करने के प्रयासों पर चिंता व्यक्त की है।
दिल्ली में विपक्षी इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में राजघाट पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी, शिवसेना-यूबीटी और एनसीपी-एसपी के सांसद भी शामिल हुए। राहुल गांधी ने राजघाट रवाना होने से पहले आरोप लगाया कि उन्हें पिछले दो दिनों से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है और उनके लोगों को मारा गया।
राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत और ज्ञानेश कुमार पर आपराधिक षडयंत्र रचकर संविधान को नष्ट करने और वोट चोरी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन चारों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। विपक्ष की मुख्य मांग ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की है और वे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं।
विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर अपनी चिंताओं का जवाब मांगा है। दिल्ली पुलिस ने राजघाट पर प्रदर्शन की घोषणा के बाद भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लगा दिए और सुरक्षा बढ़ा दी। विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मिलने का समय मांगा है और कहा है कि वे ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
पिछले दो दिनों में प्रदर्शन के दौरान कई बार पुलिस और विपक्षी सांसदों के बीच टकराव हुआ। 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग की ओर मार्च करने के बाद राहुल गांधी समेत कई सांसदों ने आकाशवाणी भवन के पास धरना दिया। 7 अक्टूबर को जंतर-मंतर जाने की कोशिश करने पर कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। 6 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कुछ नेताओं के ख़िलाफ़ पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में एफआईआर भी दर्ज की गई है।
8 अक्टूबर को बेंगलुरु में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने फ्रीडम पार्क में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और एसआईआर के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में यूट्यूबर ध्रुव राठी और अभिनेता प्रकाश राज भी शामिल हुए। ध्रुव राठी ने आरोप लगाया कि लोगों के नाम वोटिंग लिस्ट से हटाए गए और ज्ञानेश कुमार ने इसके बारे में जानकारी नहीं दी, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं आया।
इसी कड़ी में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव ने पटना में एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के लिए ज्ञानेश कुमार को ज़िम्मेदार ठहराते हुए मार्च निकाला। आरजेडी कार्यकर्ता विधानसभा के सामने शहीद स्मारक से लोक भवन की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें चुनाव आयोग के दफ़्तर के नज़दीक रोक लिया। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि फ़र्ज़ी चुनाव कराकर ज्ञानेश कुमार ने बीजेपी के सत्ता में आने का रास्ता साफ़ किया है।
इन देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच, 42 पूर्व जजों ने एक खुला पत्र जारी किया है, जिसमें उन्होंने ‘चुनाव आयोग को कमज़ोर करने की कोशिशों’ के ख़िलाफ़ चेतावनी दी है। पत्र में पूर्व जजों ने चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कथित तौर पर कमज़ोर करने के प्रयासों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने ‘बिना किसी ठोस सबूत के लगाए जा रहे ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर सवाल उठाया और चेतावनी दी कि संवैधानिक संस्थाओं को बार-बार ‘चोर’ और ‘मिलीभगत’ बताने से लोकतंत्र में जनता का विश्वास कमज़ोर होने का ख़तरा है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि संस्थाओं की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्हें बदनाम करना नहीं।
दूसरी तरफ, चुनाव आयोग और बीजेपी विपक्ष के आरोपों को ख़ारिज करते रहे हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर मतदाता सूची को अपडेट और साफ़ करने की एक प्रक्रिया है, जबकि विपक्ष इसे लेकर गंभीर सवाल उठा रहा है।