उज्जैन शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई को लेकर सोमवार को उज्जैन में जमकर हंगामा और पथराव देखने को मिला। सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद के जिस हिस्से को तोड़ा जाना था, उसके विरोध में भीड़ ने पुलिस पर पत्थर फेंके, जिसके जवाब में पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस हिंसक झड़प में क्राइम ब्रांच थाना प्रभारी पुष्पा पांचाल घायल हो गईं, और पुलिस ने माहौल बिगाड़ने के आरोप में 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

शाही मस्जिद विवाद की जड़: सड़क चौड़ीकरण परियोजना

यह पूरा विवाद उज्जैन के हृदय स्थल छत्री चौक पर स्थित शाही मस्जिद से जुड़ा है, जिसकी उम्र 100 साल से भी अधिक बताई जाती है। प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत इस मस्जिद के लगभग 9 फीट लंबे और 4 फीट चौड़े हिस्से को हटाने का प्रावधान है। इसी कार्रवाई को लेकर स्थानीय समुदाय में भारी असंतोष था, जिसने सोमवार को एक बड़े विरोध प्रदर्शन का रूप ले लिया।

सोमवार की सुबह होते ही, जैसे ही प्रशासन और पुलिस की टीमें मस्जिद के पास पहुंचीं, बड़ी संख्या में लोग वहां जमा होने लगे। प्रदर्शनकारियों का मुख्य उद्देश्य मस्जिद के हिस्से को तोड़ने से रोकना था, उनका मानना था कि यह धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाएगा और उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाएगा।

सुबह का हिंसक प्रदर्शन: पथराव और पुलिस का पलटवार
सुबह 8 बजे के आसपास, स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने अचानक पुलिस बल पर पथराव शुरू कर दिया। इस अप्रत्याशित हमले के जवाब में, पुलिस को तुरंत मोर्चा संभालना पड़ा। भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज भी किया।

इस दौरान, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा फेंके गए एक आंसू गैस के गोले को उठाकर वापस पुलिस की तरफ ही फेंक दिया, जिससे हालात और बिगड़ गए। पथराव और लाठीचार्ज के बीच, क्राइम ब्रांच की थाना प्रभारी पुष्पा पांचाल गंभीर रूप से चोटिल हो गईं, जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की गई।
महिलाओं का सक्रिय विरोध और प्रशासन की समझाइश
विरोध प्रदर्शन में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने सड़कों पर उतरकर चक्काजाम कर दिया और मस्जिद के चारों ओर लगाई गई बैरिकेडिंग को हटाने की कोशिश की। इस दौरान जवानों और प्रदर्शनकारी महिलाओं के बीच तीखी झड़पें भी हुईं, जिसने पुलिस के लिए भीड़ को नियंत्रित करना और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया।

पथराव के बाद, सुरक्षाकर्मियों ने धैर्य के साथ लोगों से बातचीत करने और उन्हें समझाने का प्रयास किया। पुलिस-प्रशासन ने पूरे इलाके को खाली कराकर गलियों में प्रवेश बंद कर दिया ताकि कोई और अप्रिय घटना न घटे और कानून व्यवस्था बनी रहे। पुलिस बल लगातार इलाके में निगरानी करता रहा।
दिन में दो बार पथराव और मुस्लिम युवाओं की ‘खुद’ तोड़ने की पहल
अधिकारियों ने बताया कि दिन के दौरान दो बार पथराव की घटनाएं हुईं। सुबह के तनावपूर्ण माहौल के बाद, शाम को फिर से एक बार पुलिस पर पथराव किया गया, जिसके चलते पुलिस को दोबारा लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागकर भीड़ को खदेड़ना पड़ा। सुरक्षाकर्मियों को पूरे इलाके को शांत करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।

इस तनावपूर्ण माहौल के बीच एक अप्रत्याशित और सकारात्मक मोड़ तब आया, जब कुछ मुस्लिम युवाओं ने खुद ही मस्जिद के उस हिस्से को तोड़ना शुरू कर दिया जो सड़क चौड़ीकरण के रास्ते में आ रहा था। उन्होंने हथौड़ों की मदद से मस्जिद के मेहराब और अन्य हिस्सों को हटाना शुरू किया, जिससे प्रशासन को बड़ी राहत मिली और तनाव कुछ कम हुआ।

पुलिस की सख्त कार्रवाई: 10 लोगों पर FIR और गिरफ्तारियां
इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए, पुलिस ने माहौल बिगाड़ने और पथराव करने के आरोप में कुल 10 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। इनमें से 5 लोग ऐसे हैं जिनकी पहचान सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के तौर पर हुई है, जिन पर भड़काऊ पोस्ट और जानकारी के माध्यम से भीड़ को उकसाने का आरोप है। हालांकि, इन इन्फ्लुएंसर्स की गिरफ्तारी की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

पुलिस ने यह भी बताया कि FIR दर्ज किए गए 10 लोगों में से 5 व्यक्ति ऐसे हैं जो उज्जैन के स्थानीय निवासी नहीं थे, बल्कि शहर के बाहर से आकर प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इन पांचों बाहरी लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उनसे इस पूरे घटनाक्रम में उनकी भूमिका और अन्य संभावित साजिशकर्ताओं के बारे में गहन पूछताछ की जा रही है।

फिलहाल, उज्जैन शाही मस्जिद के जिस हिस्से को तोड़ा जाना है, उसे हरे रंग के नेट से ढका गया है। इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पुलिस बल चप्पे-चप्पे पर नजर रख रहा है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। यह घटना उज्जैन में प्रशासनिक कार्यों और सामुदायिक सहभागिता के बीच संतुलन की चुनौती को दर्शाती है।

