IRDAI कमीशन नियम (IRDAI Commission Rules) को लेकर लाए गए नए ड्राफ्ट ने भारतीय बीमा सेक्टर और शेयर बाजार में हड़कंप मचा दिया है। भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने लाइफ इंश्योरेंस और जनरल इंश्योरेंस पॉलिसियों पर एजेंटों और डिस्ट्रीब्यूटर्स को मिलने वाले भारी-भरकम ‘अपफ्रंट कमीशन’ पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस नए नियम का मुख्य उद्देश्य पॉलिसीधारकों को फायदा पहुंचाना, मिस-सेलिंग (Mis-Selling) को रोकना और बीमा को सस्ता बनाना है। नियामक की ओर से जारी इस कंसल्टेशन पेपर के बाद इंश्योरेंस और फिनटेक कंपनियों के शेयरों में 28 प्रतिशत तक की भारी गिरावट देखने को मिली है।
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IRDAI कमीशन नियम से जुड़ी मुख्य जानकारी
बीमा नियामक द्वारा पेश किए गए नए प्रस्तावों के अनुसार, बीमा कंपनियों द्वारा पहले साल में दिए जाने वाले कमीशन के ढांचे को पूरी तरह से बदला जा रहा है। वर्तमान में, कई बीमा पॉलिसियों पर एजेंटों को पहले ही साल 30 से 40 प्रतिशत तक का भारी अपफ्रंट कमीशन मिल जाता है, जिसके कारण वे केवल नई पॉलिसी बेचने पर ध्यान देते हैं और ग्राहकों को लंबे समय तक सर्विस नहीं देते।
नए IRDAI कमीशन नियम का मकसद इसे ‘स्टैगर्ड मॉडल’ (Staggered Model) में बदलना है। इसका मतलब है कि अब एजेंटों को कमीशन एक साथ नहीं, बल्कि पॉलिसी के प्रीमियम भुगतान की अवधि (Premium Payment Term – PPT) के आधार पर किश्तों में मिलेगा। इससे डिस्ट्रीब्यूटर्स ग्राहकों को कई वर्षों तक प्रीमियम जमा करने के लिए प्रोत्साहित करने को मजबूर होंगे। IRDAI ने इन प्रस्तावों पर 25 अक्टूबर 2026 तक सभी संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं।
एजेंटों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के कमीशन का नया ढांचा
नए ड्राफ्ट के मुताबिक, प्रीमियम पेमेंट टर्म (PPT) के आधार पर लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए अलग-अलग कमीशन की अधिकतम सीमा तय की गई है:
- 5 साल से कम PPT: डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए अधिकतम सीमा 5 प्रतिशत और एजेंटों के लिए 6.25 प्रतिशत है।
- 5 साल की PPT: डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए 10 प्रतिशत और एजेंटों के लिए 12.5 प्रतिशत कमीशन की सीमा होगी।
- 6 से 8 साल की PPT: इनके लिए कमीशन क्रमशः 14 प्रतिशत और 17.5 प्रतिशत निर्धारित किया गया है।
- 9 साल की PPT: कमीशन बढ़कर 18 प्रतिशत (डिस्ट्रीब्यूटर) और 22.5 प्रतिशत (एजेंट) हो जाएगा।
- 10 साल या उससे ज्यादा की PPT: डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए अधिकतम 20 प्रतिशत और एजेंटों के लिए 25 प्रतिशत की सीमा रखी गई है।
सिंगल प्रीमियम पॉलिसी में भारी कटौती
सिंगल प्रीमियम वाली व्यक्तिगत बचत (Savings) पॉलिसियों के लिए कमीशन को काफी कम कर दिया गया है। पहले साल का कमीशन डिस्ट्रीब्यूशन संस्थाओं के लिए मात्र 1 प्रतिशत और व्यक्तिगत एजेंटों के लिए 2 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रस्ताव है। वहीं, सिंगल प्रीमियम प्योर टर्म पॉलिसी के लिए यह सीमा क्रमशः 7.5 प्रतिशत और 10 प्रतिशत रखी गई है।
मिस-सेलिंग पर एजेंट को लौटाना होगा कमीशन (Claw-Back)
अक्सर देखा जाता है कि एजेंट मोटे कमीशन के लालच में ग्राहकों को गलत जानकारी देकर या उनकी जरूरत के खिलाफ पॉलिसी बेच देते हैं। नए IRDAI कमीशन नियम के तहत ‘क्लॉ-बैक’ (Claw-Back) का सख्त प्रावधान लाया गया है। यदि यह साबित हो जाता है कि एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर ने ग्राहक को गुमराह करके पॉलिसी बेची है, तो संबंधित एजेंट को अपना पूरा कमीशन वापस बीमा कंपनी को लौटाना होगा। इसके अलावा, मिस-सेलिंग करने वाले एजेंटों का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध कराया जाएगा ताकि भविष्य में ग्राहक सावधान रहें।
लोन के साथ जबरन बीमा बेचने पर रोक (Forced Bundling)
कई बार ग्राहक जब बैंक या एनबीएफसी (NBFC) से कार लोन या होम लोन लेने जाते हैं, तो उन्हें जबरदस्ती एक विशेष बीमा पॉलिसी (जैसे महंगी क्रेडिट शील्ड) खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। IRDAI के नए प्रस्ताव में क्रेडिट (लोन) के साथ बीमा की इस ‘कोर्सिव सेलिंग’ या जबरन बंडलिंग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। ग्राहकों को यह पूरी आजादी होगी कि वे लोन लेते समय बीमा खरीदें या नहीं।
शेयर बाजार पर असर: इंश्योरेंस स्टॉक्स में भारी गिरावट
IRDAI के इस ड्राफ्ट के सामने आते ही शेयर बाजार में बीमा कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के शेयरों में भूचाल आ गया। सबसे बड़ा झटका ऑनलाइन इंश्योरेंस ब्रोकिंग कंपनी पीबी फिनटेक (PB Fintech – पॉलिसीबाजार की पैरेंट कंपनी) को लगा, जिसके शेयर एक ही दिन में 28 प्रतिशत तक टूट गए। इसके अलावा टर्टलमिंट फिनटेक में 20 प्रतिशत, एचडीएफसी लाइफ (HDFC Life) में 5 प्रतिशत और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस (ICICI Pru Life) के शेयरों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कमीशन कैपिंग से इन कंपनियों के राजस्व और मुनाफे (Profit Margins) पर सीधा नकारात्मक असर पड़ेगा।
डार्क पैटर्न (Dark Patterns) पर लगेगा प्रतिबंध
बीमा बेचने वाली कई एग्रीगेटर वेबसाइटें और डिजिटल प्लेटफॉर्म ग्राहकों को पॉलिसी की कीमत या फीचर्स दिखाने से पहले उनका मोबाइल नंबर और अन्य निजी जानकारी मांग लेते हैं, जिसके बाद ग्राहकों को दिन-भर अनचाहे स्पैम कॉल्स आने लगते हैं। नियामक ने नए नियमों के तहत इस तरह के ‘डार्क पैटर्न’ पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। अब बिना निजी जानकारी साझा किए ही ग्राहकों को बीमा के विकल्प और कीमत देखने की पारदर्शी सुविधा मिलेगी।
निष्कर्ष
IRDAI कमीशन नियम से जुड़े ये प्रस्ताव फिलहाल ड्राफ्ट (मसौदा) स्टेज में हैं। लेकिन अगर ये नियम अपने मौजूदा स्वरूप में अंतिम रूप ले लेते हैं, तो यह भारतीय बीमा क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा सुधार साबित होगा। इससे ग्राहकों को न केवल सस्ता और पारदर्शी बीमा मिलेगा, बल्कि डिस्ट्रीब्यूटर्स द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी पर भी लगाम लगेगी। हालांकि, बीमा एजेंटों, डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों और फिनटेक कंपनियों के लिए यह एक बड़ा झटका है, जिन्हें अपने बिजनेस मॉडल और रेवेन्यू सोर्स में व्यापक बदलाव करने होंगे।

