
दिल्ली में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है. करीब 33 लाख मतदाताओं को वोटर लिस्ट में उनकी जानकारी से जुड़ी विसंगतियों या पुराने रिकॉर्ड से मैपिंग नहीं होने के आधार पर नोटिस दिए जा रहे हैं. इनमें पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं. इस मामले पर कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाया है.
उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अब आडवाणी जैसे वरिष्ठ नेता को भी यह साबित करना पड़ेगा कि वह वोटर हैं या नहीं. उन्होंने इस प्रक्रिया को लोगों के लिए अपमानजनक बताया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए.
अब आडवाणी जी को भी यह साबित करना पड़ेगा कि वह वोटर हैं या नहीं ।चुनाव आयोग यह कर क्या रहा है? यह तो एक तरह से इन लोगों का अपमान है । अब हद हो चुकी है । ज्ञानेश कुमार जी को कोई नोटिस क्यों नहीं दिया जाता ! इसी तरह से करोड़ो लोगों के वोट काट दिए गए और चुनाव करवा लिए गए । सुप्रीम… https://t.co/Q7TFvJybRb
— Rajeev Shukla (@ShuklaRajiv) September 20, 2026
राजीव शुक्ला ने क्या कहा?
राजीव शुक्ला ने अपनी पोस्ट में लिखा कि “अब आडवाणी जी को भी यह साबित करना पड़ेगा कि वह वोटर हैं या नहीं.” उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग आखिर यह प्रक्रिया क्यों कर रहा है. उन्होंने आगे कहा कि यह लोगों का अपमान करने जैसा है और अब स्थिति हद तक पहुंच गई है. शुक्ला ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को नोटिस दिए जाने की मांग भी की. उन्होंने दिल्ली में वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठाया और सुप्रीम कोर्ट से पूरी प्रक्रिया रद्द करने की मांग की. ये शुक्ला के राजनीतिक आरोप और मांग हैं, न्यायिक निष्कर्ष नहीं.
33 लाख मतदाताओं को क्यों भेजे गए नोटिस?
दिल्ली की SIR प्रक्रिया में करीब 33.13 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में ऐसी जानकारी मिली है, जिसके आधार पर उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं. इनमें करीब 13.79 लाख मतदाता ‘No Mapping’ श्रेणी में हैं, यानी उनका रिकॉर्ड 2002 की पिछली मतदाता सूची से नहीं जुड़ पाया. करीब 19.33 लाख मतदाताओं को ‘Logical Discrepancies’ श्रेणी में रखा गया है. चुनाव आयोग के अनुसार, नोटिस का मतलब यह नहीं है कि इन लोगों का नाम तुरंत वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है. दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान संबंधित मतदाता जरूरी दस्तावेज देकर अपनी पात्रता साबित कर सकते हैं. उदाहरण के तौर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी नोटिस मिला था, लेकिन दस्तावेजों के सत्यापन के बाद उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए मान्य कर दिया गया.
47 लाख नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर
दिल्ली में SIR के तहत 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 97.53 लाख मतदाता हैं. इससे पहले दिल्ली की मतदाता सूची में करीब 1.45 करोड़ नाम थे. ड्राफ्ट सूची से लगभग 47.56 लाख नाम बाहर रह गए. चुनाव आयोग की ओर से बताई गई श्रेणियों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्हें अपने पुराने पते पर नहीं पाया गया या जो स्थान बदल चुके हैं. इसके अलावा मृत मतदाताओं और एक से अधिक जगह पंजीकरण वाले नाम भी शामिल हैं.
मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
SIR की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई है. याचिकाकर्ताओं ने 33 लाख नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम और उन्हें नोटिस देने के कारण सार्वजनिक करने की मांग की है. साथ ही ‘Logical Discrepancies’ और नो मैपिंग की श्रेणियां तय करने के आधार और प्रक्रिया की जानकारी देने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के लिए 21 सितंबर 2026 की तारीख तय की थी. इस बीच दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से 19 सितंबर को नोटिस से जुड़े आंकड़ों और विसंगतियों का अधिक विस्तृत डेटा जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है.
दावे और आपत्तियां 30 सितंबर तक
दिल्ली SIR में जिन मतदाताओं को अपने नाम या दस्तावेजों को लेकर आपत्ति है, उनके लिए दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह प्रक्रिया 30 सितंबर 2026 तक चलेगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को जारी होने की बात कही गई है.







